मानवीय मन: अंतर्मन और बाह्यमन | The Human Mind
‘चंचलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम्।तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम्।।’ -अर्जुन उवाच. अर्थ: हे कृष्ण, मन अत्यंत चंचल, स्वच्छंद, उद्दंड और अत्यंत बलवान है। इसे वश […]
‘चंचलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम्।तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम्।।’ -अर्जुन उवाच. अर्थ: हे कृष्ण, मन अत्यंत चंचल, स्वच्छंद, उद्दंड और अत्यंत बलवान है। इसे वश […]
1. सिंहगढ़ की गूँज जिसकी तलवार की धार से दुश्मन घबराए,जिसकी चाल से मुग़ल भी कांपे और घबराए।वो कोई और नहीं, शिवबा थे हमारे,मराठा स्वराज्य […]
एक बार एक वीर राजा अपने सहचरों के साथ शिकार खेलने जंगल में गया था। वहाँ शिकार के चक्कर में, सभी एक दूसरे से बिछड़ […]
1 याद कर लेना मुझे तुम,कोई भी जब पास ना हो, चले आएंगे एक आवाज में, भले हम खास ना हो। 2 तेरी मोहब्बत ने हमें […]
1 राहों में कांटे बिछाए तो क्या,मंजिल तक पहुँचने का जज़्बा कम न होगा।ख्वाबों की उड़ानें कभी थमती नहीं,हौंसलों का आसमां किसी से कम न […]
एक बार की बात है, किसी जंगल में एक कौआ रहता था, वो बहुत ही खुश था, क्योंकि उसकी बहुत ज्यादा इच्छाएं नहीं थीं। वह […]
एक योगी तपस्वी थे। एक दिन वे एक भूपती नामक दानधर्मी राजा के महल में पहुँचे। भूपती राजा को आनंद हुआ। राजा गद्गद् हो गए […]
एक बार एक शिव-भक्त अपने गाँव से केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकला। पहले यातायात की सुविधाएँ तो थी नहीं, वह पैदल ही निकल पड़ा। […]
कृष्णनगर के पास एक गांव में एक ब्राह्मण रहते थे। वे ब्राह्मण पुरोहिती का काम करते थे। एक दिन यज़मान के यहाँ पूजा कराकर घर […]
अमरीश नामक एक राजा था। उसने परमात्मा को खोजना चाहा। वह किसी आश्रम में गया। उस आश्रम के प्रधान साधु महाराज ने कहा, जो कुछ […]
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