मन की असीम और अजिंक्य आंतरिकता: The Infinite and Invincible Interiority of The Human Mind!
अपनी परंपराओं के माध्यम से हम कुछ विशिष्ट संभावनाओं को अपना लेते हैं। सामान्यतः आपका स्वभाव, आपका सामर्थ्य, आपकी प्रवृत्तियाँ और गुणविशेष — यह सब […]
अपनी परंपराओं के माध्यम से हम कुछ विशिष्ट संभावनाओं को अपना लेते हैं। सामान्यतः आपका स्वभाव, आपका सामर्थ्य, आपकी प्रवृत्तियाँ और गुणविशेष — यह सब […]
‘चंचलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम्।तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम्।।’ -अर्जुन उवाच. अर्थ: हे कृष्ण, मन अत्यंत चंचल, स्वच्छंद, उद्दंड और अत्यंत बलवान है। इसे वश […]
सामने जो भी प्रसंग या घटना घटित हो रही है, वह आपमें भावनाए (फिलिंग्ज) नही जगा रही है, जी; तो सभी फिलिंग्ज कहांसे जनम ले […]
मन की दुनिया में उभरने वाले संकल्प कोई भी कठिन से कठिन परिस्थिति का सामना कर सकते है। इस मन का उचित रूप से नियोजन […]
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