मानवीय मन: अंतर्मन और बाह्यमन | The Human Mind
‘चंचलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम्।तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम्।।’ -अर्जुन उवाच. अर्थ: हे कृष्ण, मन अत्यंत चंचल, स्वच्छंद, उद्दंड और अत्यंत बलवान है। इसे वश […]
‘चंचलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम्।तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम्।।’ -अर्जुन उवाच. अर्थ: हे कृष्ण, मन अत्यंत चंचल, स्वच्छंद, उद्दंड और अत्यंत बलवान है। इसे वश […]
1. सिंहगढ़ की गूँज जिसकी तलवार की धार से दुश्मन घबराए,जिसकी चाल से मुग़ल भी कांपे और घबराए।वो कोई और नहीं, शिवबा थे हमारे,मराठा स्वराज्य […]
“ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः”अर्थ: वासुदेवनन्दन परमात्मा स्वरूपी भगवान श्रीकृष्णको वंदन है, उन गोविंदको पुनः पुनः नमन है, वे हमारे […]
एक बार एक वीर राजा अपने सहचरों के साथ शिकार खेलने जंगल में गया था। वहाँ शिकार के चक्कर में, सभी एक दूसरे से बिछड़ […]
1 याद कर लेना मुझे तुम,कोई भी जब पास ना हो, चले आएंगे एक आवाज में, भले हम खास ना हो। 2 तेरी मोहब्बत ने हमें […]
1 राहों में कांटे बिछाए तो क्या,मंजिल तक पहुँचने का जज़्बा कम न होगा।ख्वाबों की उड़ानें कभी थमती नहीं,हौंसलों का आसमां किसी से कम न […]
एक बार की बात है, किसी जंगल में एक कौआ रहता था, वो बहुत ही खुश था, क्योंकि उसकी बहुत ज्यादा इच्छाएं नहीं थीं। वह […]
वट सावित्री व्रत कथा प्रसिद्ध तत्त्वज्ञानी अश्वपति भद्र देश के राजा थे। उनको संतान का सुख नहीं प्राप्त था। इसके लिए उन्होंने 18 वर्ष तक […]
प्रह्लाद ऋषि कश्यप और दिति के पुत्र हरिण्यकश्यप का पुत्र था। प्रह्लाद की माता कयाधु थी जो कि विष्णु भक्त थी और भक्त प्रह्लाद इनसे […]
एक योगी तपस्वी थे। एक दिन वे एक भूपती नामक दानधर्मी राजा के महल में पहुँचे। भूपती राजा को आनंद हुआ। राजा गद्गद् हो गए […]
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