मानवीय मन: अंतर्मन और बाह्यमन | The Human Mind
‘चंचलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम्।तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम्।।’ -अर्जुन उवाच. अर्थ: हे कृष्ण, मन अत्यंत चंचल, स्वच्छंद, उद्दंड और अत्यंत बलवान है। इसे वश […]
‘चंचलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम्।तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम्।।’ -अर्जुन उवाच. अर्थ: हे कृष्ण, मन अत्यंत चंचल, स्वच्छंद, उद्दंड और अत्यंत बलवान है। इसे वश […]
1 राहों में कांटे बिछाए तो क्या,मंजिल तक पहुँचने का जज़्बा कम न होगा।ख्वाबों की उड़ानें कभी थमती नहीं,हौंसलों का आसमां किसी से कम न […]
अमरीश नामक एक राजा था। उसने परमात्मा को खोजना चाहा। वह किसी आश्रम में गया। उस आश्रम के प्रधान साधु महाराज ने कहा, जो कुछ […]
मन की दुनिया में उभरने वाले संकल्प कोई भी कठिन से कठिन परिस्थिति का सामना कर सकते है। इस मन का उचित रूप से नियोजन […]
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