मानसिक समस्याओं का ‘भ्रम’: Deceptive Nature of The Mental Illness

अक्सर मानसिक बीमारियाँ किसी छलावे की तरह कुछ लोगों के जीवन में रोल प्ले करती हैं। वे बीमारियाँ होती तो हैं, लेकिन ‘वे न होने का बेहतरीन अभिनय’ करने का प्रयास किया जाता है, तो फिर पीड़ित व्यक्ति यह मानने लगता है कि —’शायद पहले कोई मानसिक समस्या थी, लेकिन अब शायद ठीक हो गई है।’ ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नथिंग इज़ विजिबल इन देम (उन पीडितोंमें कुछ भी बाहर से दिखाई नहीं देता)। उनके करीब रहने वाले लोग भी इस मीठे भ्रम में रहते हैं कि, “इसका कभी-कभी दिमाग सटक जाता है, बाकी समय तो यह एकदम ठीक रहता है।”

यह जो ‘ठीक होना’ है, यही असली छलावा है। क्योंकि इन मानसिक समस्याओं के कारण मन के साथ-साथ शरीर भी (शारीरिक लक्षणों के रूप में) प्रभावित होता चला जाता है। कभी कभी शारीरिक बिमारियो को आमंत्रण मिल जाता है।

शरीर की छोटी-बड़ी बीमारियाँ जब एक बड़ा ब्रह्मराक्षस बन जाती हैं, तब कई बार बहुत देर हो चुकी होती है। यह मैं अपने अनुभव से कह रही हूँ।
इसे थोड़ा और सरल करके समझाती हूँ।

मानसिक उपचारों की आवश्यकता है— यह बात जब एक बार पूरी तरह से पक्की (कंफर्म) हो जाती है, तब व्यक्ति ऐसे उपाय तलाशने लगता है कि कहाँ और कैसे इसका इलाज कराया जाए। फिर फोन पर बातचीत के बाद दिमाग में कोई न कोई थेरेपिस्ट शॉर्टलिस्ट भी हो जाता है। लेकिन कुछ मामलों में यहीं से ‘कहानी में ट्विस्ट’ आ जाता है!!

जिस थेरेपिस्ट के पास जाने का मन ही मन तय किया जाता है, बातचीत के दौरान उसके सकारात्मक वाइब्रेशन्स, अपने आप मन पर मरहम लगाने वाले होते हैं। फिर यह जो थोड़ी-बहुत ताज़गी (रिफ्रेशमेंट फील गूड ट्रीटमेंट) मिलती है, उससे व्यक्ति को थोड़ी देर के लिए सब अच्छा-अच्छा लगने लगता है। बात को ठीक से समझिये, थेरपीस्ट व्यक्ती की सकारात्मक तरंगे, ऊस पीडित व्यक्ती को आनंददायक एहसास की तरह लगती है। तब थेरपीस्ट के साथ चल रही बातचीत खतम होने के बाद, पीड़ित व्यक्ति का एक मन उससे कहता है कि—’मुझे हुआ ही क्या है? कुछ भी तो नहीं हो रहा है। रहने दो, उपचार वगैरह की कोई ज़रूरत नहीं है।’ और फिर— अब सब कैंसल!

यहीं पर छिपा होता है यह छलावा —मनोराज्य पर हुकूमत चलाने वाला, बुद्धि और विवेक का अकल्याणकारी इंटरफेरेंस!!

और होता यह है कि इस मानसिक बीमारी या समस्या को दबा दिया जाता है। मन और शरीर पर इसका प्रभाव और अधिक गहरा तथा क्रोनिक (दीर्घकालिक एवं जटिल) बनता जाता है।

फिर स्थिति जब पूरी तरह असहनीय हो जाती है, तब तक सब कुछ काफ़ी अस्त-व्यस्त हो चुका होता है। इन निरंतर दबावों के कारण कोई एक या कई शारीरिक बीमारियाँ भी विकराल रूप ले चुकी होती हैं।

दिखता नहीं है ना मन आँखों से?! लेकिन क्या यह दिन-रात महसूस (सेंस) नहीं होता? जिस तरह हाथ-पैरों पर चोट लगने पर, आप उसकी देखभाल करते हैं, क्या उसी तरह मन के ‘भीतर की गहराइयों में लगी इन चोटों’ को समय रहते ठीक नहीं करना चाहिए? ज़रा जवाब दीजिए— अपने लिए भी और अपनों के लिए भी।

चलो, इतनी राहत ज़रूर है कि समाज में अब यह जागरूकता (अवेयरनेस) तो आ गई है कि मानसिक बीमारियाँ किसी को भी हो सकती हैं, और समय पर किये गये, उचित उपचार से वे ठीक भी हो जाती हैं।
जब स्थिति अत्यधिक हाइपर और अनियंत्रित हो, तभी दवाइयों (मेडिसिन्स) की तरफ रुख करना चाहिए। अन्यथा नहीं!

संमोहन उपचार यानी हिप्नोथेरपी एक औषधिविहीन (ड्रगलेस) थेरपी है। इस क्षेत्र में मुझे खुद 23 + वर्ष हो चुके हैं। दवाइयों के भारी डोज़ से पूरी तरह परेशान हो चुके अनेक लोग हिप्नोथेरपी के ज़रिए पूरी तरह ठीक हुए हैं। कहीं ऐसा न हो कि बहुत देर हो जाए—’देर ना हो जाए, कहीं देर ना हो जाए…’
तो, समय रहते जाग जाइए। समोर उपचार करने वाला  हिप्नोथेरपिस्ट कोई जादू-टोना नहीं करता!! बल्कि इस हिप्नोथेरपी की सहायता से आपकी ही अपनी, खुद की 100 में से 90 प्रतिशत मानसिक ताक़त, जो बेकार (फुकट) जा रही होती है, आप उसी का सही इस्तेमाल करने लगते हैं। (माईंड प्रोग्रामिंग)

स्ट्रेस, टेंशन, डिप्रेशन किसे नहीं है?!! मंदी का झटका किसे नहीं लगा है? मंदी तो दिन ब दिन बढती जा रही है। लेकिन इसके लिए अपनी इस अनमोल ज़िंदगी आप दाँव पर लगा देंगे क्या?

खैर. ब्लड प्रेशर, माइग्रेन, डायबिटीज, पाचन बिमारीया और न जाने कौन-कौन सी गंभीर बीमारियाँ डिटेक्ट या अट्रैक्ट होने तक, अपनी किमती ज़िंदगी को खुद बर्बाद मत कीजिए। समय रहते मानसिक बीमारियों के इस छलावा से बाहर आ जाइए।

गूगल या वैसी ही किसी सर्च इंजिन वाली जगह पर खोजबीन करके, या किसी की प्रत्यक्ष अथवा सोशल मीडिया की सक्सेस स्टोरी की व्हिडिओज से प्रेरित होकर जो लोग संपर्क करते हैं, उनमें से मानसिक समस्याग्रस्त लोगों की दो मुख्य श्रेणियाँ (कैटगरी) होती हैं—मैं आपको बताती हूँ।

पहली कैटेगरी ऐसी होती है,
मानसिक समस्या से बाहर निकलने का पूरा और पक्का निर्णय लेकर सीधे अप्रोच करने वालों की। जो जल्द से जल्द उपचार लेकर, पूरी तरह ठीक होकर एक नई ज़िंदगी की शुरुआत करना चाहते हैं— यही जिनका सौ प्रतिशत (श्योरशॉट) लक्ष्य होता है और जो एक नई जिंदगी की सुरुवात वाला नजरिया अपने मन के,  सामने रखकर तुरंत पूछते हैं, “मुझे पहले सेशन की अपॉइंटमेंट कब मिलेगी?” यह पहली कैटेगरी उन लोगों की होती है। इनमें से कुछ व्यक्ति तो यहाँ तक पहुँच पाना संभव न होने पर, ऑनलाइन काउंसलिंग लेकर अपनी इस प्रक्रिया को पूरा कर लेते हैं।

और दूसरी कैटेगरी होती है,
उन लोगों की, जो लोग – “मैं पिछले कई सालों से दुखी हूँ, इस सब से मुझे बाहर कौन निकालेगा?”— इस सवाल को मन में लाखों बार घुमा-फिराकर, बादमे जाकर अप्रोच करते हैं। लेट निर्णय लेते है और लेट आते है। इन सभी भाई-बहनों पर कभी कभी बहुत दया और सहानुभूति आती है। वह इसलिए, क्योंकि ये भविष्य में खुद को ‘मैं पूरी तरह ठीक हो चुका/चुकी हूँ’ इस रूप में अपने आपको, इमेजिन ही नहीं कर पा रहे होते हैं (उनको अपनी आखो के सामने,वह तस्वीर किसी धुंधली इमेज यानी ब्लर फोटो जैसी दिखाई दे रही होती है)। ये लोग एक बार संपर्क करेंगे; फिर कहेंगे कि, “मैं बाद में बताऊँगा/बताऊँगी।” और वह ‘बाद’ कभी 2-3 महीने बाद आता है, कभी छह महीने, तो कभी एक, दो या चार साल बाद! अरे भाई, जब सत्य में आप काउंसलिंग के लिए आएँगे, तभी तो कुछ होगा न!

इसमें कुछ भी अजीब या विशेष लगने जैसा नहीं है। बस खुद से पूछिए—’मेरा टाइम कब आएगा?’—और तुरंत एक पक्का निर्णय ले लीजिए। रोज़ सूरज, चाँद और तारे अपने नियम से उगते-डूबते रहेंगे। यह दुनिया हमेशा अपनी ही दुनिया में मग्न रहने वाली है। अपनी सेहत और अपनी ख़ुशी की परवाह हमें खुद ही करनी पड़ती है, है ना?

भारत के अन्य राज्यों में रहने वाले लोगों के साथ-साथ विदेशों में बसने वाले प्रवासियों के लिए भी ऑनलाइन हिप्नोथेरपी सेशन (Online Hypnotherapy Sessions) की बेहतरीन सुविधा उपलब्ध है। यह पढ़कर शायद आपको थोड़ा आश्चर्य हुआ होगा कि—इतनी दूर बैठे व्यक्ति को आख़िर कैसे हिप्नोटाइज़ किया जा सकता है? लेकिन यह बिल्कुल मुमकिन है और बहुत प्रभावी तरीके से होता है। हिप्नोथेरपी के लिए कुछ भी असंभव नहीं है!

देर न करें, बस समय पर सही कदम उठाएं और जल्द से जल्द अपने माईंड प्रोग्रामिंग किये हुए मन के माध्यम से, स्वस्थ एवं बलशाली जीवन की ओर मार्गक्रमण सुरू कीजिए।


Dr. Sunetra Javkar 9820373281 ©
Hypnotherapist, Mind Counselor, Naturopath, Past Life Regression & Crystal Healing Therapist. QUANTUM HOLISTIC HEALTH.

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